UP News : यूपी के आगरा नगर निगम में 'विकास की गंगा' में 'षडयंत्रकारी' खूब हाथ धो रहे हैं। जिम्मेदार बेफिक्र होकर काम करवा रहे हैं, उन्हें किसी का डर नहीं। दनादन काम और भुगतान का सिलसिला जारी है। अभी तो शिकायत से 'षडयंत्र रूपी किले' की 'कागजी ईंटों' का खुलासा हुआ। जल्द ही मुख्यमंत्री तक शिकायत पहुंचने वाली है।
UP News : सूबे की योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति यूपी के आगरा नगर निगम में बेअसर है। यहां भाजपा की ही ‘मिनी सरकार’ है, फिर भी सरकारी धन को ठिकाने लगाने के लिए षडयंत्रों का दौर चल रहा है। कूटरचित दस्तावेजों के सहारे करोड़ों रुपये के काम हो रहे हैं। सोचिए, जब फर्म कूटरचित दस्तावेज का इस्तेमाल कर रही है वो कैसे कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाएगी? जिस फर्म का टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने का आधार ही कूटरचित है वो कैसे सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का पालन करेगी? विभाग के जिम्मेदार अधिकारी क्यों दस्तावेजों के सत्यापन में लापरवाही बरत रहे हैं? क्यों कूटरचित दस्तावेज की शिकायतों के आने का इंतजार होता है? क्या शिकायत नहीं मिलेगी तो नियमों का पालन नहीं कराया जाएगा?
जी हां, हम बात कर रहे हैं यूपी के आगरा नगर निगम की। यहां भाजपा के सबसे अधिक पार्षद हैं। मेयर भी भाजपा की हैं। सभी विधानसभा क्षेत्रों से भाजपा के विधायक हैं। दोनों लोकसभा से भाजपा के सांसद हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष भी भाजपा से हैं। एक नहीं, दो नहीं तीन-तीन मंत्री हैं। हर तरफ भाजपा का दबदबा है फिर भी योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को चुनौती दी जा रही है। आगरा नगर निगम में ‘षडयंत्रकारी’ कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल करके करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो जिनके दस्तावेज ही कूटरचित हैं तो वो योगी सरकार की छवि को बनाए रखने के लिए क्या मानकों के साथ निर्माण कार्य करेंगे। सूत्रों की मानें तो आगरा नगर निगम में काम करने वाली एक फर्म की आईजीआरएस पर शिकायत की गई, जिसमें शिकायतकर्ता ने अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने वाले से कहा कि आपके यहां उक्त फर्म ने दो कार्य किये हैं। संबंधित विभाग के अपर मुख्य अधिकारी शिकायत का निस्तारण करते हुए कहा कि उक्त फर्म द्वारा यहां ये दो कार्य( नगला बहादुर में बारात घर एवं नगला पंचायत/नगला पंचम में सीसी निर्माण) नहीं किये गए हैं। जिस विभाग द्वारा जारी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर उक्त फर्म ने आगरा नगर निगम ने करोड़ों रुपये का टेंडर प्राप्त किया, उस अनुभव प्रमाण पत्र में लिखे निर्माण कार्यों को संबंधित विभाग ने मना कर दिया है। जिस विभाग का अनुभव प्रमाण पत्र उक्त फर्म ने लगाया है उसने आईजीआरएस पर अपने यहां उक्त फर्म द्वारा उक्त कार्य न करने की बात कही है।
आगरा नगर निगम में कूटरचित दस्तावेजों लगाकर टेंडर प्रक्रिया में प्रतिभाग करने और काम मिलने का खेल चल रहा है। कूटरचित दस्तावेज दूसरे जनपद तो छोड़िए दूसरे प्रदेशों से भी बनवाकर यहां इस्तेमाल हो रहे हैं। योगी सरकार की नीति को चुनौती देने वाली फर्में दनादन काम कर रहे हैं और भुगतान भी ले रही हैं।

नगर आयुक्त ने फर्मों की कराई थी जांच, रिपोर्ट लटकी
नगर निगम में इसी तरह के कई प्रकरण पूर्व में नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल के प्रकाश में आये थे, उन्होंने गंभीरतापूर्वक कई फर्मों पर कार्रवाई की। साथ उन्होंने ज्यादातर फर्मों के दस्तावेजों की गहन जांच के आदेश दिये थे। उन्होंने जांच कमेटी भी बनाई थी। कई दिनों तक जांच चली, लेकिन रिपोर्ट लटक गई। जांच ठंडे बस्ते में चली गई। ऐसा होने से षडयंत्र करने वाली फर्मों का हौसला बुलंद हो गया। षडयंत्रों का सिलसिला जारी रहा। यहां भी सवाल उठते हैं किसके आदेश पर जांच ठंडे बस्ते में चली गई?
महापौर ने भी जांच और कार्रवाई के दिये थे निर्देश
कूटरचित दस्तावेजों को आधार बनाकर टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने एवं काम पाने का प्रकरण पूर्व में महापौर हेमलता दिवाकर के संज्ञान में आया था तो उन्होंने भी जांच करके उक्त फर्मों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिये थे। इसके बाद भी बड़ी संख्या में फर्मों की होने वाली जांच अधर में लटक गई। सवाल उठता है किसके आदेश पर वो जांच बीच में रोकी गई थी अखिर क्यों फर्मों की जांच पूरी नहीं की गई थी?
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