Agra News: आगरा नगर निगम में सदन के अंदर और बाहर हंगामा हुआ। सदन में नालों की सफाई और अधिकारियों की मनमानी पर पार्षद नाराज हो गए।
भाजपा पार्षद ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर शर्ट उतारकर प्रदर्शन किया। अधिकारी नहीं दे पाये पार्षदों के सवालों का जवाब, कार्यप्रणाली पर सवाल
आगरा। स्मार्ट सिटी को डुबोने वाले नगर निगम के अधिकारियों का पर्दाफाश हो गया है। ये पर्दाफाश पार्षदों ने स्वयं सदन में किया है। जिम्मेदार अधिकारी सवालों के जवाब नहीं पाये, जो नाले-नालियों की बेहतर सफाई का दावा करते हैं। सोचिए, जब नगर स्वास्थ्य अधिकारी को ही नहीं पता कि शहर में कितने नाले हैं? नालों का टेल कहां हैं? कौन सा नाला कितना साफ हुआ? जबकि उनकी तैनाती को काफी समय हो गया है। इसके बाद कैसे माना जाए कि शहर में मानसून के दौरान जलभराव नहीं होगा? तमाम सवालों का लेकर पार्षदों ने हंगामा काट दिया। भाजपा पार्षद ने तो भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोप लगाते हुए शर्ट उताकर प्रदर्शन कर डाला।
आगरा नगर निगम में सोमवार को सदन के अंदर और बाहर हंगामा हुआ। सदन की बैठक 11 बजे बुलाई गई थी। जैसे ही बैठक शुरू हुई वैसे ही सदन के बाहर कांग्रेसियों ने जनसमस्याओं को लेकर प्रदर्शन कर दिया। उन्होंने नारेबाजी करते हुए सदन में घुसने की कोशिश की। दरवाजों का धक्के तक दिये। बता करें अंदर की तो वहां भी माहौल हंगामा वाला था। भाजपा पार्षद रवि बिहारी माथुर, राकेश जैन आदि ने नालों की सफाई टेल से शुरू करने का प्रस्ताव लगाया था। रवि बिहारी माथुर ने प्रस्ताव पढ़ने के बाद जब नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव वर्मा से पूछा कि शहर में कितने नाले हैं? वे इसका जवाब नहीं दे पाये। उन्होंने पूछा कि नालों का टेल कहां है? नगर स्वास्थ्य अधिकारी यह भी नहीं बता पाये। इसके बाद तो पार्षदों का धैर्य जवाब दे गया। एक के बाद एक पार्षद ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी को आड़े हाथ लिया। पार्षदों ने कहा कि नाले गंदगी से भरे पड़े हैं, अधिकारी कागजों में सफाई किये जा रहे हैं। एसी गाड़ी और ऑफिस में बैठकर सफाई अभियान चला रहे हैं। फर्जी आंकड़ेबाजी किये जा रहे हैं। सफाई के दौरान अधिकारी मौके पर नहीं जाते हैं, पार्षदों को सूचना तक नहीं देते हैं। बीच-बीच में पॉकेटों में नालों की सफाई की जाती है, जिससे नालों में गंदगी का हाल वही रहता है। बारिश के दौरान नाले उफनने लगते हैं। लोगों को जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ता है। अधिकारियों का तेल की खपत पर ध्यान हैं, नाले-नालियों की सफाई पर नहीं है।
पार्षदों के सवालों और आरोपों के बाद मेयर हेमलता दिवाकर ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि नगर स्वास्थ्य अधिकारी के पास पर्याप्त जानकारी नहीं है। इन्हें अपने विभाग की जानकारी तो रखनी चाहिए। ऐसे अधिकारियों का आगरा नगर निगम में रहने का कोई मतलब नहीं है। अगली बार सदन में आएं तो पार्षदों के सवालों के जवाबों के साथ आएं। नालों की सफाई को लेकर चल रही चर्चा के बीच भाजपा पार्षद हरिओम गोयल ने अधिकारियों पर नालों की सफाई में मनमानी और भ्रष्टाचार को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। वे शर्ट उतारकर डायस के आगे बैठ गए। उनके साथ भाजपा पार्षद पंकज अग्रवाल भी प्रदर्शन करने लगे। पार्षदों ने आरोप लगाया कि नालों की सफाई नहीं हो रही है। गंदगी से नाले भरे हुए हैं, यही हाल रहा तो बारिश के दौरान जलभराव होगा। लगभग 15 सफाई कर्मचारी ऐसे हैं, जो आगरा नगर निगम के साथ-साथ फिरोजाबाद नगर निगम से भी सेलरी ले रहे हैं। यानि दो नगर निगमों में नौकरी कर रहे हैं। ये सब अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है। सरकार को बदनाम करने का काम किया जा रहा है। बसपा पार्षद कप्तान सिंह ने नालों की सफाई के लिए टास्क फोर्स बनाने की मांग रखी। उक्त पार्षदों के प्रदर्शन से नाराज मेयर ने नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य को निर्देश दिये के वे प्रदर्शन करने वाले पार्षदों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करें। इसी के साथ ही सदन के बाहर हंगामा करने वाले कांग्रेसियों पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिये।

जलकल विभाग की वसूली पर रोक
सदन में जलकल विभाग के बिलों को लेकर भी चर्चा की गई। पार्षद रवि बिहारी माथुर, प्रकाश केशवानी, अनुराग चतुर्वेदी, राकेश जैन, शरद चौहान, हेमंत प्रजापति आदि ने प्रस्ताव लगाया था। जलकल विभाग की लापरवाही, अनियमितताओं के चलते लगातार बिल भेजे जा रहे हैं। उन्हें एआरवी का एरियर लगाकर दिखाया जा रहा है। बसपा पार्षद सुनील शर्मा, अरविंद मथुरिया ने हाउस टैक्स में एआरवी को ठीक करने मांग की। मेयर ने इसे गंभीरता से लेते हुए कमेटी बनाने के निर्देश दिये। साथ ऐसे उपभोक्ताओं से अभी वसूली न करने के निर्देश भी दिये। एमजी रोड से

मजार हटाने को लेकर चर्चा
नगर निगम के सदन में भाजपा पार्षद शरद चौहान ने एमजी रोड पर बनी अवैध मजार को हटाने के लिए प्रस्ताव लगाया था, जिस पर चर्चा शुरू हुई। बसपा पार्षद सुहेल कुरैशी ने कहा कि मजार अवैध नहीं है। काफी पुरानी है, इसे इस तरह नहीं हटाया नहीं जा सकता है। सरकारी दस्तावेजों में मजार है। उन्होंने कहा कि धर्म गुरुओं, मजार की देखभाल करने वाले और प्रशासनिक अधिकारी बैठकर सही रास्ता निकालें, जिससे शहर के विकास में कोई दिक्कत नहीं आए। मेयर ने कहा कि इसको लेकर पहले से ही प्रशासनिक स्तर पर वार्ता चल रही है।

नालों के निर्माण की होगी जांच
सदन में बसपा पार्षद यशपाल सिंह ने प्रस्ताव लगाया कि नालों के निर्माण में मानकों की अनदेखी की जा रही है। अधिकारियों की मिलीभगत से घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। गुणवत्ताविहीन कार्य हो रहा है, इससे नालों के गिरने का डर बना रहेगा। शिकायतों के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मेयर हेमलता दिवाकर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिये कि जांच करके एक सप्ताह में रिपोर्ट दें, जिससे कार्रवाई हो सके।

साइट पर नहीं जाते अधिकारी-इंजीनियर
भाजपा पार्षद हेमंत प्रजापति ने सदन में अधिकारियों और इंजीनियरों पर आरोप लगाया कि सड़क का निर्माण हो या नालों की सफाई वे मौके पर नहीं जाते हैं। निर्माण और सफाई कार्य मनमाने ढंग से हो रहे हैं। ऐसी बैठकर फाइलों में कार्य को किया जा रहा है,जबकि मौके पर कार्य की गुणवत्ता खराब है। सरकार को बदनाम करने का काम किया जा रहा है।
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