Potato Farming : यूपी में फिर से मौसम का मिजाज बदल गया है। शनिवार को आगरा जनपद में बारिश हुई। इस साल औसतन बारिश ज्यादा हुई है। इससे खेतों में नमी ज्यादा है। नमी ज्यादा रहने से किसानों को खासकर आलू की फसल को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है। बीज से लेकर मृदा तक का उपचार बहुत जरूरी है।
Potato Farming : देश के आलू उत्पादन में यूपी की अहम भूमिका है, तो वहीं यूपी के आलू उत्पादन में आगरा मंडल की अहम भूमिका है। आगरा मंडल में भी जनपद आगरा अव्वल है। यहां के प्रत्येक विकास खंड में आलू का उत्पादन हो रहा है। फिर बदले मौसम ने किसानों को डराना शुरू कर दिया है। उन्हें डर है कि आलू की बुवाई में चूक की तो पछिताने का मौका भी नहीं मिलेगा। इसलिए आलू की प्रजाति का चयन करने में किसानों की ‘जिद’ कुफरी बहार है। बीज उत्पादन के लिए मिलने वाले आलू की डिमांड में कुफरी बहार का आंकड़ा 90 फीसदी से अधिक है। जिसने उद्यान विभाग के लिए भी संकट की स्थिति उत्पन्न कर दी है।
सब्जियों के राजा आलू का रकबा आगरा जनपद में उद्यान विभाग के अनुसार लगभग 75 हजार हेक्टेयर है। आगरा मंडल में सबसे अधिक आलू का उत्पादन आगरा जनपद में होता है। यहां के विकास खंड खंदौली, एत्मादपुर, शमसाबाद, फतेहाबाद, बिचपुरी, बरौली अहीर आलू उत्पादन में आगे हैं। बता दें कि किसानों को मौसम की मार का डर सताने लगा है। जिस तरह बार-बार मौसम बिगड़ रहा है उससे आलू की फसल में रोग-बीमारी आने की संभावना है। साथ ही खेतों की मिट्टी में इस बार ज्यादा नमी होने के कारण फसल में रोग-बीमारियां आने की संभावना है। जिन प्रजातियों में पानी की मात्रा ज्यादा है उनके अंकुरण से लेकर कंद बनने तक रोग-बीमारी की चपेट का डर बना रहेगा। किसानों का कहना है कि मौसम को देखते हुए इस बार सबसे ज्यादा बुवाई कुफरी बहार की करने की प्लानिंग है। आगरा की जलवायु में ऐसे मौसम में कुफरी बहार ही एक ऐसी प्रजाति है, जिस पर किसानों को भरोसा ज्यादा है। आगरा मंडल में लंबे समय से यह प्रजाति किसान उगाते आ रहे हैं। बुवाई के दौरान खेतों में नमी और खुदाई के दौरान तापमान अधिक होने पर उसे सहन करने की क्षमता कुफरी बहार में ज्यादा है। किसानों का कहना है इसका छिलका मजबूत होता है। बीज साइज के आलू की बुवाई ही सबसे ज्यादा होती है। कलम करके आलू कम मात्रा में बोया जाता है। इसमें अन्य प्रजातियों के मुकाबले कम पानी होता है, जिससे मिट्टी में सड़ने का कम खतरा होता है। अंकुरण की प्रक्रिया भी ठीक होती है। उद्यान विभाग में आलू बीज के लिए 1100 से अधिक आवेदन जमा हो चुके हैं, जबकि अभी यह प्रक्रिया 5 अक्टूबर तक चलेगी।

संभावित आलू की प्रजातियां
आगरा के किसानों के लिए कुफरी बहार, ख्याति, मोहन, गंगा, पुखराज, नीकंठ, सूर्या, गरिमा, चिपसोना प्रजातियां आने की संभावना है। किसानों की पहली पसंद कुफरी बहार है, जिसके लिए मारामारी रहती है।-
उद्यान विभाग पर बढ़ रहा प्रेशर
किसान जिस तरह से आलू की डिमांड कर रहे हैं, उससे उद्यान विभाग पर प्रेशर बढ़ रहा है। बीज के लिए सिफारिशों का भी दौर चल रहा है। ज्यादातर किसानों को कुफरी बहार आलू का बीज ही चाहिए। बीज के लिए आवेदन का सिलसिला जारी है।
मौसम ने बदल दिया दिमाग
किसानों का कहना है कि जिस तरह से मौसम का मिजाज है, उससे तो आलू की फसल में नुकसान की संभावना है। कुफरी बहार ही एक ऐसी प्रजाति है, जो इस तरह के मौसम में किसानों की उम्मीदों पर खरी उतर सकती है। इसके अलावा अन्य प्रजातियां नमी वाले मौसम में गड़बड़ा सकती है। इसलिए कुफरी बाहर की बुवाई करना ज्यादा ठीक रहेगा।

आलू की बुवाई में जल्दबाजी न करें
कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी आगरा के वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि मौसम को ध्यान में रखकर ही बुवाई करें। बीज का उपचार ठीक तरीके से करें। इस बार खेतों की मिट्टी में नमी ज्यादा रहेगी। बारिश का बार-बार मौसम बन रहा है। नमी के कारण आलू की फसल में जड़ गलन जैसे रोगों का खतरा ज्यादा रहता है। इसलिए पूरी जानकारी और समझदारी से ही आलू की बुवाई करें। बीज के उपचार में कोई लापरवाही न बरतें।
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