UP News : आगरा नगर निगम में इन दिनों काली पट्टी के डर की चर्चा है। मेयर हेमलता दिवाकर और नगर आयुक्त आईएएस अधिकारी अंकित खंडेलवाल के बीच के विवाद से नगर निगम के अधिकारी, कर्मचारी और पार्षद दो धड़ों में बंट गए हैं। किसने किसका साथ दिया ये सब स्पष्ट हो गया है।
UP News : यूपी के आगरा में भले ही मेयर हेमलता दिवाकर और नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल के बीच का विवाद लखनऊ के हस्तक्षेप के बाद स्थगित हो गया है, लेकिन माहौल में गरमाहट अभी बनी हुई है। काली पट्टी से डर जुड़ा हुआ है। चर्चा तो बहुत आगे तक की हो रही हैं।
जी हां, आगरा नगर निगम का विवाद यूपी की राजनीति में एक चर्चा का विषय बना हुआ है। योगी सरकार के आईएएस अधिकारी आगरा के नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल और भाजपा की मेयर हेमलता दिवाकर के बीच पिछले काफी दिनों से विवाद की स्थिति बनी हुई है। इस बार तो कुछ ज्यादा ही विवाद बढ़ गया था। दोनों में से कोई भी पीछे को हटने को तैयार नहीं था। पत्राचार के बाद शक्ति प्रदर्शन तक की स्थिति बन गई। मेयर ने सदन की बैठक बुलाई, जिसमें सभी दलों के पार्षद तो आए, लेकिन नगर निगम के अधिकारी तो छोड़िए एक कर्मचारी भी सदन कक्ष में नहीं पहुंचा था। सदन की बैठक में नगर आयुक्त के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव पर 70 से अधिक पार्षदों के हस्ताक्षर थे। जिसे मेयर ने शासन में भेजकर कार्रवाई की मांग की। हालांकि बाद में सदन की बैठक से बसपा पार्षदों ने वॉकआउट कर दिया था। बात यहां नहीं रुकी थी। नगर आयुक्त के खिलाफ निंदा प्रस्ताव की बात से नगर निगम का परिवार (अधिकारी एवं कर्मचारी) नाराज हो गया। अगले दिन हड़ताल का ऐलान कर दिया, लेकिन किसी तरह नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने हड़ताल को रुकवाया। अधिकारी और कर्मचारी हड़ताल करने से तो रुक गए थे, लेकिन उनका गुस्सा बना हुआ था। उन्होंने बांह पर काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया। यानी काम तो किया, लेकिन काली पट्टी बांधी।

मेयर हेमलता दिवाकर के खिलाफ नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी काली पट्टी बांधकर अपना गुस्सा जता चुके थे। सूत्रों की मानें तो भले ही लखनऊ से मेयर और नगर आयुक्त को समझाकर मामले का शांत करवा दिया गया है। शहर के विकास के लिए दोनों को मिलकर काम करने के निर्देश दिए हैं। बात यहां भी अभी खत्म होती नजर नहीं आ रही है। सूत्रों की मानें तो नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल का समर्थन यानि निंदा प्रस्ताव का विरोध करने के लिए जिन-जिन निगम कर्मियों ने बांह पर काली पट्टी बांधी थी, वे चिह्नित माने जा रहे हैं। चर्चा है कि मेयर के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को कहीं न कहीं डर सता रहा है। उन्होंने काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया था। वैसे भी आईएएस अधिकारी अंकित खंडेलवाल को आगरा में नगर आयुक्त के पद पर काफी समय हो गया है। अगर ये विवाद न होता तो भी उनका तबादला होना था। उन्हें प्रमोशन के साथ जाना है। चर्चा है कि आईएएस अधिकारी अंकित खंडेलवाल के आगरा नगर निगम से तबादले के बाद उनका साथ देने वालों के साथ कैसा व्यवहार होगा? काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन जो किया था। कुछ लोगों को अभी से डर सताने लगा है।

सत्ताधारी मेयर के खिलाफ इतना बड़ा विरोध प्रदर्शन करना कोई छोटा मामला नहीं है। मेयर के खिलाफ मतलब सरकार के खिलाफ प्रदर्शन माना जाता है। सरकार को घेरने के लिए विपक्ष के पास ये बड़ा मुद्दा है।

तबादले के बाद क्या डर सच हो सकता है?
नगर निगम में जिस तरह की चर्चा है क्या वास्तव में आईएएस अधिकारी अंकित खंडेलवाल का तबादला होने से बाद में यहां उनका साथ देने वाले नगर निगम अधिकारियों और कर्मचारियों को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।
Leave a comment