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Fertilizer News : मिट्टी-रुपए बचाने हैं तो इस खाद को लाएं If you want to save money and soil, then get this fertilizer

Fertilizer News : कृषि विभाग का कहना है कि आगरा जनपद के किसानों के लिए खाद की कोई कमी नहीं है। किसानों को मिटटी की आवश्यकता के हिसाब से ही खाद का इस्तेमाल करना चाहिए। रबी सीजन की फसलों के लिए एनपीके और एसएसपी भी बहुत अच्छा खाद है।



Fertilizer News : खेतों में फसलों का चक्र न अपनाने और ज्यादा मात्रा में लगातार खाद (डीएपी) देने के कारण खेतों की मिट्टी बीमार पड़ रही है। किसानों को लागत के अनुरूप उत्पादन नहीं दे पा रही है। केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों को खाद और बीज को लेकर जागरूक करने में लगी हैं। किसानों की जिद कहें या अनदेखी, जिसके कारण मिट्टी को डीएपी की ओवर डोज का कुप्रभाव झेलना पड़ रहा है। जनपद में खाद को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं रहती हैं, जबकि रबी सीजन की फसलों के लिए कृषि विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में खाद की उपलब्धता है।

जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि आगरा जनपद के किसानों के लिए खाद (फॉस्फेट उर्वरक) की कोई कमी नहीं है। रबी सीजन की फसलों के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद है। रबी सीजन की फसलों के लिए खाद की पर्याप्त मात्रा में डिमांड की गई है। सही मात्रा में खाद आगरा पहुंच रहा है। सितंबर महीने में अभी तक डीएपी (डाई अमोनियम फॉस्फेट) की उपलब्धता 9318 मीट्रिक टन है। इसी तरह एनपीके (नाट्रोजन फॉस्फेट पोटाश) 12531 मीट्रिक टन उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि किसानों को फसल के अनुरूप जब जरूरत हो तभी खाद खरीदें। ज्यादा दिन पहले से खाद खरीदकर न रखें, जिससे अव्यवस्थाएं फैलें। इसका बाजार में दुकानदार मौके का फायदा न उठा सकें। किसान को नवंबर में खाद की जरूर पड़ेगी तो अभी से न खरीदें। नवंबर महीने में ही खरीदें, खाद की कोई कमी नहीं है। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि एक रैक 2500 मीट्रिक टन की आगरा पहुंंचने वाली है। किसानों का एनपीके की तरफ रुख बढ़ रहा है, जिसे और बढ़ाना है।

खेतों की मिट्टी को बचाने और फसलों की लागत कम करने के लिए किसान एनपीके खरीदें। अधिकांश फसलों में इसका इस्तेमाल करें।

विनोद कुमार
जिला कृषि अधिकारी, आगरा

किस फसल के लिए कौन सी खाद अच्छी

जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि किसानों को आलू की फसल में डीएपी (DAP) के बजाय एनपीके का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे लागत कम होगी और उत्पादन भी पूरा होगा। साथ ही मिट्टी को तीनों मुख्य पोषक तत्व एक साथ मिल जाएंगे। गेहूं की फसल में भी एनपीके (NPK)का इस्तेमाल करें। सरसों की फसल में किसानों को एसएसपी (SSP) का इस्तेमाल करना चाहिए, जिससे दानों में चमक और वजन बढ़ता है।

इस खाद का भी करें इस्तेमाल

जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि सरकार नैनो डीएपी और नैनो यूरिया पर भी जोर दे रही है। किसानों को नैनो डीएपी और यूरिया का इस्तेमाल करना चाहिए। ये ऐसे खाद हैं, जिनसे किसानों की जेब पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ता है। साथ ही फसलों का उत्पादन अच्छा होता है। इसके अलावा खेतों की मिट्टी का स्वास्थ्य भी ठीक रहता है।

अंकुरों और जड़ों के लिए खतरनाक अमोनियम

कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान का कहना है की सामान्यतः जनपद के किसान आलू की फसल की बुवाई के समय 3 से 4 गुना ज़्यादा मात्रा में डीएपी का इस्तेमाल करते हैं, जो आलू फसल को नुकसान पहुंचता सकता है। खास कर जब आपकी मृदा का पीएच मान 7 से अधिक होता है, क्योंकि खेत में डीएपी घुलने पर अमोनियम निकलकर वाष्पशील होने से अंकुरों और जड़ों के लिए नुकसानदेह हो सकता है, जो खतरनाक होता है।

खेतों में फसलों का चक्र न अपनाने और ज्यादा मात्रा में लगातार खाद (डीएपी) देने के कारण खेतों की मिट्टी बीमार पड़ रही है। किसानों को लागत के अनुरूप उत्पादन नहीं दे पा रही है। केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों को खाद और बीज को लेकर जागरूक करने में लगी हैं। किसानों की जिद कहें या अनदेखी, जिसके कारण मिट्टी को डीएपी की ओवर डोज का कुप्रभाव झेलना पड़ रहा है। जनपद में खाद को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं रहती हैं, जबकि रबी सीजन की फसलों के लिए कृषि विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में खाद की उपलब्धता है।

डीएपी से अधिक घुलनशील है एनपीके

कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी आगरा के मृदा वैज्ञानिक डॉ. संदीप सिंह ने बताया कि डीएपी (डाई-अमोनियम फास्फेट) में दो तत्व नाइट्रोजन और फास्फोरस होता है, जबकि एनपीके एनपीके में तीन तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस, और पोटैशियम होता है। डीएपी में पोटैशियम न होने के कारण यह हमारी दानेदार फसलें धान, मूंग, उड़द, गेहूं आदि के लिए उत्तम नहीं होता है। ऐसी फसलों में हमें एनपीके का ही प्रयोग करना चाहिए। वहीं एनपीके डीएपी से अधिक घुलनशील होने के कारण मिट्टी में आसानी से घुलकर सीधे फसलों पर अपना प्रभाव डालता है। डॉ. संदीप सिंह का कहना है की यदि किसान की जमीन हल्की है तो उसे डीएपी के स्थान पर एनपीके का ही प्रयोग करना चाहिए।

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