Flood News : उत्तर प्रदेश के कई शहरों में बाढ़ का पानी लोगों को डरा रहा है। आगरा के ब्रिटिशकालीन जल संस्थान के कैंपस में बाढ़ का पानी घुस गया है। दीवार टूटने लगी है।
आगरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा-वृन्दावन में बाढ़ का पानी कहर मचा रहा है तो आगरा में भी लगातार वह कॉलोनियों में बढ़ रहा है। कई कॉलोनियों में बाढ़ का पानी हिलोरे मार रहा है। अब जलकल विभाग (जलसंस्थान) के मुख्यालय कैंपस में बाढ़ के पानी की एंट्री हो गई है।
आगरा में यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। मीडियम फ्लड लेबिल (499) फुट को बाढ़ का पानी पार कर गया है। वर्ष 1978 में आगरा में बाढ़ के पानी का स्तर 508 फुट पर पहुंच गया था। इसके बाद बीच में वर्ष 2010 और 2023 में पानी का स्तर 500 फुट का आंकड़ा छू गया था, लेकिन इस बार जलस्तर उससे कहीं आगे बढ़ गया है। बढ़ता पानी का जलस्तर लोगों को वर्ष 1978 में आई बाढ़ की याद दिलाने लगा है। शहर की पेयजल व्यवस्था करने वाला जलकल विभाग का मुख्यालय ब्रिटिशकालीन है। आज भी यहां ब्रिटिशकालीन बिल्डिंग बनी हुई है। जलसंस्थान को अब जलकल विभाग कहा जाता है। जलकल विभाग का मुख्यालय यमुना नदी के किनारे पर बना हुआ है। यमुना में बाढ़ आने के कारण पानी कैंपस की दीवार के पार अंदर घुस गया है।

जलकल विभाग के महाप्रबंधक एके राजपूत ने मंगलवार को कैंपस का निरीक्षण किया। उन्होंने अधीनस्थों से कहा कि बाढ़ का पानी कैंपस में घुस आया है। अलर्ट रहे, पानी को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करें। उन्होंने बताया कि दीवार में नदी का पानी टकरा रहा, जिससे दीवार के किनारे की मिट्टी हट रही है। दीवार कमजोर हो रही है। दीवार टूटने लगी है। कई जगह दीवार में दरारें आ गईं हैं। पानी बढ़ा तो कैंपस की दीवार को ज्यादा नुकसान हो सकता है।

ट्रांसफार्मर को बाढ़ से बचाने की तैयारी
जलकल विभाग के महाप्रबंधक एके राजपूत ने बताया कि यमुना में बाढ़ के चलते कैंपस में कुछ कार्य किए जा रहे हैं। इनमें जमीन पर रखे ट्रांसफार्मर को ऊंचाई पर रखने के लिए टिनशेड के साथ प्लेटफार्म बनाया जा रहा, जिससे ट्रांसफार्मर को बाढ़ के पानी से बचाया जा सके। इससे शहर की पेयजल व्यवस्था को प्रभावित होने से रोकना है।
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