Mustard Farming : मधुमक्खियों से सरसों की पैदावार 10 से 20 फीसदी तक बढ़ जाती है। इसके साथ ही शहद उत्पादन से अतिरिक्त कमाई भी होती है।
Mustard Farming : तिलहन में सरसों मुख्य फसल है, जिसकी बुवाई (बिजाई) रबी सीजन में होती है। रबी सीजन अक्टूबर माह से शुरू हो जाता है, लेकिन सरसों की बुवाई सितंबर से ही शुरू हो जाती है। भरपूर लागत के बाद भी किसानों को पर्याप्त मात्रा में पैदावार नहीं मिल पा रही है। इसके पीछे कहीं न कहीं एक कारण परागण की प्रक्रिया प्रभावित होना भी माना जाता है। सरसों स्वपरागण वाली फसल है। कृषि वैज्ञानिक कहते हैं कि किसान सरसों की खेती के साथ-साथ मधुमक्खी पालन करें तो कम लागत में दोगुना लाभ कमा सकते हैं। मधुमक्खियों से सरसों की पैदावार 10 से 20 फीसदी तक बढ़ जाती है। इसके साथ ही शहद उत्पादन से अतिरिक्त कमाई भी होती है।
भारत में सरसों की खेती रबी सीजन की प्रमुख फसलों में गिनी जाती है। सरसों देश की कृषि अर्थव्यवस्था और किसानों की आय बढ़ाने में अहम स्थान रखती है। यह भारतीय रसोई का अहम हिस्सा भी है, जिसके तेल का उपयोग भोजन ने में किया जाता है। साथ ही सरसों के पत्ते सब्जी के रूप में और इसकी खली दुधारू पशुओं के चारे के रूप में उपयोग की जाती है। किसानों के लिए सरसों एक लाभदायक फसल है। इसकी खेती से किसानों को अच्छा मुनाफा मिलता है। सरसों की फसल के साथ मधुमक्खी पालन करने से किसानों को कम लागत में दोगुना फायदा हो सकता है।
सरसों के खेत में परागण करके मधुमक्खियां दाने बनने की दर बढ़ा देती हैं।

सरसों की उपज बढ़ाएगा ये तरीका
कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी (आगरा) के वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि किसान सरसों की खेती के साथ मधुमक्खी पालन करें तो इससे दो फायदे होंगे। पहला सरसों की उपज में 10 से 20 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है। दूसरा शहद मिलेगा। प्रसंस्करण सुविधाओं के साथ किसान शहद से अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।
कितनी दूर तक बैठती हैं मधुमक्खी
कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी (आगरा) के वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि मधुमक्खी खेत के 1-2 किलोमीटर के दायरे में फूलों पर बैठती हैं। इस प्रक्रिया से सरसों की फलियों में बीज की दर काफी बढ़ जाती है, जिससे उत्पादन भी बढ़ता है।

मुनाफे की मिठास बढ़ाएगा शहद
कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी (आगरा) के वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि मधुमक्खी पालन से किसानों को शहद उत्पादन का लाभ मिलता है। एक बॉक्स से औसतन 25-30 किलो शहद निकलता है, जिसका बाजार अच्छा मूल्य मिल जाता है। किसान सीजन में 3-4 बार शहद निकालकर कमाई कर सकते हैं। किसान समय पर शहद निकालते रहें तो मक्खियां लगातार शहद बनाती रहती हैं।

फूलों में परागण की प्रक्रिया
सरसों की फसल में फूलों के एक-दूसरे के संपर्क में आने पर स्वपरागण होता है, जिससे परागण नर भाग से मादा भाग तक पहुंचते हैं।मधुमक्खियां फूलों पर बैठती हैं। वे एक से दूसरे फूल पर जाती हैं, इससे भी परागण की प्रक्रिया होती है। इस प्रक्रिया को बढ़ाने के लिए मधुमक्खियों का उपयोग किया जाता है, जिससे फसल की पैदावार बढ़ती है।
Beekeeping : अच्छा मुनाफा दे रहीं मधुमक्खियां
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ राजेंद्र सिंह चौहान कहते हैं कि मधुमक्खी पालन करने से किसानों को अच्छा मुनाफा हो रहा है। मधुमक्खी पालन को एपिकल्चर भी कहते हैं। यह मधुमक्खियों के रखरखाव और उनके छत्तों (कृत्रिम घरों) के प्रबंधन से जुड़ा है। यह एक कृषि आधारित सहायक कुटीर उद्योग है, जिससे शहद, मोम, पराग, रॉयल जेली और प्रोपोलिस जैसे उत्पाद मिलते हैं। इसके माध्यम से पर-परागण (cross-pollination) भी होता है, जिससे विभिन्न फसलों की उत्पादकता बढ़ती है। भारत में यह एक लाभकारी व्यवसाय है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद करता है। मधुमक्खी पालन को लेकर किसानों में रुचि बढ़ रही है। कृषि वैज्ञानिक भी किसानों को जागरूक करने में लगे हुए हैं।
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