Agra News: नगर निगम के पार्षदों ने बड़ी मांग कर डाली है। जिससे शहर की तस्वीर बदल सकती है। लोगों को राहत मिलेगी। पार्षद स्टडी करने बेंगलुरु, मैसूर और ऊटी गए थे। अब स्टडी रिपोर्ट सौपेंगे।
Agra News: मोहब्बत की नगरी को और सुंदर एवं स्वच्छ बनाने के लिए नगर निगम के पार्षदों ने बड़ी मांग कर डाली है। वे बेंगलुरु, मैसूर और ऊटी से स्टडी करके आगरा लौटे हैं। अब उन्हें वहां सिस्टम आगरा में चाहिए, जिसके लिए सदन में भी बात रखेंगे। उससे पहले एक रिपोर्ट महापौर को सौपेंगे।

आगरा से हाल ही में पार्षदों का एक प्रतिनिधिमंडल स्टडी टूर के लिए बेंगलुरु, मैसूर और ऊटी के लिए गया था। पार्षदों ने वहां ड्रेनेज सिस्टम, सीवरेज सिस्टम और सफाई व्यवस्था को बारीकी से जाना है। हालांकि कई मायनों में आगरा नगर निगम की कार्यप्रणाली बेंगलुरु, मैसूर और ऊटी से बेहतर है। स्टडी टूर से लौटे भाजपा पार्षद दल के उपनेता प्रकाश केशवानी उर्फ शेरा भाई ने बताया कि हमें आगरा शहर को और सुंदर एवं स्वच्छ बनाने की दिशा में कदम बढ़ाना है। बेंगलुरु, मैसूर और ऊटी में स्टडी टूर के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारी की। वहां ड्रेनेज सिस्टम, सीवरेज सिस्टम और सफाई व्यवस्था देखा। एसटीपी में लगी मशीनों के मामले में आगरा बहुत आगे है। वहां के मुकाबले आगरा नगर निगम के एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) और एसपीएस (सीवरेज पंपिंग स्टेशन) तकनीकी के मामले में बेहतर है। उन्होंने बताया कि बेंगलुरु और मैसूर में ड्रेनेज सिस्टम बहुत अच्छा है। वहां सभी छोटे-बड़े नाले पूरी तरह से ढके हुए हैं। नाले कवर्ड होने से कोई भी उनके अंदर कूड़ा नहीं फेंक सकता है। नालों पानी बहता है न कि कूड़ा। नाले कवर्ड होने से नालों के पानी का बहाव भी ठीक रहता है। पार्षद श्री केशवानी ने बताया कि ड्रेनेज सिस्टम में एक और अच्छी व्यवस्था है वह सेंसर वाली है। बेंगलुरु एवं मैसूर में नालों में सेंसर लगे हैं। नालों के साथ-साथ सीवर लाइनों में भी सेंसर हैं। वहां नगर निगम के अधिकारियों ने बताया था कि ये जो सेंसर लगे हैं, उनसे नालों और सीवर लाइनों में कहीं भी रुकावट आती है तो उसकी जानकारी सेंसर के माध्यम से हो जाती है। सेंसर से स्थान चिह्नित होता है, जहां समस्या है। वहीं टीम पहुंचकर समस्या का समाधान करती हैं। उन्होंने बताया कि जब सफाई कार्य चलता है तो नालों से स्लैब हटाकर सफाई होती है। उसके बाद फिर से स्लैब रख दिये जाते हैं।

कमांड सेंटर से होती है मॉनिटरिंग
पार्षद प्रकाश केशवानी ने बताया कि नगर निगम परिसर में कमांड सेंटर बना हुआ है, जहां से सभी नालों और सीवर लाइनों की मॉनिटरिंग होती है। नालों और सीवर लाइनों में सेंसर की व्यवस्था आगरा में भी होनी चाहिए। यहां तो नालों और सीवर लाइनों में कूड़ा निकलता है। नालों को ढकने और उनमें सेंसर लगाने से आगरा शहर की सुंदरता एवं स्वच्छता बढ़ेगी।
महापौर को सौपेंगे स्टडी रिपोर्ट
पार्षद प्रकाश केशवानी ने बताया कि स्टडी टूर पर जो भी पार्षदों ने सीखा है उसकी रिपोर्ट महापौर को सौंपी जाएगी। इस रिपोर्ट में आगरा के लिए सुझाव भी दिए जाएंगे। जैसे नालों और सीवर लाइनों में सेंसर की व्यवस्था। नालों को ढकने जैसे सुझाव शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि सदन में भी अपना अनुभव रखेंगे। आगरा शहर के लिए बेहतर सुझाव भी देंगे। शहर को और सुंदर एवं स्वच्छ करवाने के लिए हर संभव प्रयास किये जाएंगे।

चूहों की समस्या का भी समाधान
बेंगलुरु और मैसूर शहर में लोगों को चूहों की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है। पार्षद प्रकाश केशवानी ने बताया कि आगरा शहर में चूहों की समस्या बहुत है। यहां चूहे सड़कों, पुलों और मकानों को खोखला करने में लगे हुए हैं। स्टडी टूर के दौरान वहां अधिकारियों से चूहों की समस्या पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया था कि शहर में शतप्रतिशत डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन नगर निगम स्वयं करता है। लोगों द्वारा सड़क किनारे, खाली स्थानों पर कूड़ा नहीं फेंका जाता है। इसलिए चूहों की समस्या नहीं है। खुले में कूड़ा रहेगा तो चूहों की समस्या भी रहेगी।
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