छलेसर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में मौखिक एवं गैर-मौखिक संचार के साथ Body Language और Time Management पर हुई चर्चा
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के नेताजी सुभाष चंद्र बोस छलेसर परिसर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी एंड पैरामेडिकल साइंसेज एवं डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज की ओर से गुरुवार को “Barrier, Prospective & Elements of Communication Skills” विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। कुलपति प्रो. आशु रानी के संरक्षण में हुए कार्यक्रम में दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के डीन (फैकल्टी ऑफ एजुकेशन) प्रो. एनपीएस चंदेल ने विद्यार्थियों को संवाद क्षमता को बेहतर बनाने से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी।
प्रो. चंदेल ने बताया कि प्रभावी संवाद केवल शब्दों के सही इस्तेमाल तक सीमित नहीं है। सामने वाले तक संदेश किस तरह पहुंचाया जाता है, इसमें आवाज की शैली, प्रस्तुति और व्यवहार भी अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को बातचीत के दौरान संदेश को सहज और स्पष्ट रखने के तरीके बताए।
फार्मेसी के विद्यार्थियों के संदर्भ में उन्होंने Communication Skills की उपयोगिता पर विशेष जोर दिया। भविष्य में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पेशेवरों के साथ काम करते समय आपसी समन्वय और स्पष्ट बातचीत जरूरी होगी।
संवाद के अलग-अलग आयाम
व्याख्यान में गैर-मौखिक संचार के तहत चेहरे के भाव, आंखों की गतिविधि, नजरों का व्यवहार तथा सिर और हाथों की गतिविधियों को समझाया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि कई बार बिना शब्दों के भी व्यक्ति का व्यवहार महत्वपूर्ण संदेश देता है।
खास जानकारी
Kinesics — शरीर की गतिविधियों और हाव-भाव
Haptics — स्पर्श से जुड़ा संचार
Artifacts — पहनावे एवं बाहरी रूप-रंग से व्यक्त संकेत
Chronemics — समय के उपयोग से संबंधित संचार
आवाज की भूमिका भी महत्वपूर्ण
प्रो. चंदेल ने मौखिक संचार के दौरान टोन, पिच और रिदम जैसे पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने समझाया कि एक ही बात को अलग तरीके से प्रस्तुत करने पर उसका प्रभाव बदल सकता है। इसलिए बातचीत में आवाज के उतार-चढ़ाव और प्रस्तुति शैली पर ध्यान देना आवश्यक है।
संचार की बाधाओं पर चर्चा
कार्यक्रम में मौखिक संचार के दौरान सामने आने वाली समस्याओं तथा प्रभावी संवाद में रुकावट पैदा करने वाले विभिन्न कारणों पर भी जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को इन चुनौतियों को पहचानकर अपनी संवाद क्षमता में सुधार करने के लिए प्रेरित किया गया।
आयोजन में इनकी रही भूमिका
फार्मेसी विभागाध्यक्ष डॉ. रवि शेखर के नेतृत्व में कार्यक्रम का संयोजन डॉ. प्रतिभा मिश्रा ने किया। समन्वयक के रूप में डॉ. अभिलाष सिंह, शिवाली ढिकोनिया, अंजलि चौहान एवं राशि कुलश्रेष्ठ ने जिम्मेदारी निभाई। कार्यक्रम में प्रो. ब्रजेश कुमार तिवारी, डॉ. प्रतिभा मिश्रा, डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, डॉ. अरिंजय जैन, राशि कुलश्रेष्ठ, मुकुल यादव, अंजलि चौहान एवं शिवाली ढिकोनिया सहित छात्र उपस्थित रहे।
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