‘सुपर अल नीनो’ के दुष्प्रभाव का खतरा फसलों पर मंडरा रहा है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किसानों को बचाव के तरीके बताए हैं।
आगरा। उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बिचपुरी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में गुरुवार को खेत बचाओ अभियान, सुपर अल नीनो और सूखे के प्रभाव को लेकर किसानों के साथ संवाद किया। इस दौरान जनपद स्तरीय तिलहन मेला आरबीएस इंजीनियरिंग कॉलेज बिचपुरी सभागार में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ कृषि मंत्री, विधायक रानी पक्षालिका सिंह, चौ. बाबूलाल, एमएलसी मानवेंद्र सिंह गुरुजी द्वारा दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया।

कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी में वृक्षारोपण करके एक पेड़ मां के नाम तथा वृक्षारोपण महायज्ञ अभियान के अंतर्गत पौधारोपण किया गया। कृषि मंत्री द्वारा कृषि यंत्रों ट्रैक्टर की चाभी, पीएम कुसुम योजना के अंतर्गत सोलर पंप, बीज मिनी किट का वितरण, किसान क्रेडिट कार्ड के लाभार्थियों तथा कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा विकसित तिल के बीजों का वितरण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड आदि का वितरण करके किसानों को लाभान्वित किया।
कार्यक्रम में किसानों द्वारा एक-एक करके उनकी समस्या पूछी गईं। कृषि मंत्री ने सीधा संवाद किया, जिसमें किसानों ने मक्का व मूंग के क्रय केंद्र खोलने, आलू की समस्या, डीएपी वितरण आदि समस्या को रखा। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किसानों से संवाद करते हुए कहा कि कम वर्षा की वर्तमान परिस्थितियों में किसानों को धान जैसी अधिक पानी वाली फसलों के स्थान पर ज्वार, बाजरा, मक्का, उड़द, मूंग, कोदो, सांवा एवं मड़ुवा जैसी मोटे अनाज और दलहनी फसलों की खेती अपनानी चाहिए। इन फसलों में पानी और उर्वरक की आवश्यकता कम होती है, लागत घटती है तथा किसानों को बेहतर लाभ प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हित में निरंतर कार्य कर रही है। ‘खेत बचाओ अभियान’, ‘किसान पाठशाला’ तथा ‘विकसित कृषि अभियान’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से आधुनिक तकनीक किसानों तक पहुंचाई जा रही है। अब धान और गेहूं के साथ-साथ सरसों, अरहर, मक्का, बाजरा सहित कई फसलों की भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद की जा रही है। किसानों को भुगतान एक सप्ताह से दस दिन के भीतर सीधे उनके खातों में भेजा जा रहा है।

सामान्य से लगभग 55 प्रतिशत कम वर्षा होने के कारण प्रदेश में जल संकट की संभावना बढ़ गई है। ऐसे में जल संरक्षण और कम पानी वाली फसलों को अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने विभिन्न खरीफ फसलों के एमएसपी पहले ही घोषित कर दिए हैं, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री कुसुम योजना, कृषि यंत्र एवं बीज अनुदान जैसी योजनाओं का लाभ पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से उपलब्ध करा रही है। किसानों को सोलर पंपों पर 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है, जिससे सिंचाई की लागत में कमी आएगी। श्री शाही ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को समय पर यूरिया, डीएपी एवं अन्य उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। किसी भी समिति पर खाद की कमी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग की अपील करते हुए प्राकृतिक खेती, गोबर की खाद, जीवामृत, घनजीवामृत तथा हरी खाद के अधिकाधिक प्रयोग पर बल दिया। साथ ही गुणवत्तापूर्ण एवं प्रमाणित बीज उत्पादन को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

कृषि मंत्री ने कहा कि अल नीनो के प्रभाव के कारण वर्षा में कमी देखने को मिल रही है। जल एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि 12 जुलाई को प्रदेशभर में 35 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे तथा सभी किसानों से “एक पेड़ मां के नाम अभियान में सहभागी बनने का आग्रह किया। कार्यक्रम में संयुक्त कृषि निदेशक, फर्टिलाइजर हरेन्द्र मिश्रा, संयुक्त कृषि निदेशक विनोद यादव, उप निदेशक कृषि मुकेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार, जिला उद्यान अधिकारी मनोज चतुर्वेदी, कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डॉ. आरएस चौहान एलडीएम ऋषिकेश बनर्जी, सीवीओ डॉ. डीके पांडे सहित भारी संख्या में किसान मौजूद रहे।
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