UP News : देश में 10 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाता है। अकेले आगरा जनपद में सोमवार को कृमि संक्रमण से बचाव के लिए 15.1 लाख बच्चों ने एल्बेंडाजोल की गोली खिलाई गईं। आगरा के 5314 स्कूलों और 2988 आंगनबाड़ी केंद्रों में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया गया। अब 14 फरवरी को मॉप अप राउंड चलेगा, जिसमें छूटे हुए बच्चों को दवा खिलाई जाएगी।
आगरा/लखनऊ
UP News : आपके बच्चे जल्दी-जल्दी बीमार होने का एक कारण कृमि भी हो सकते हैं, इसलिए एक साल से 19 साल तक के बच्चों को एल्बेंडाजोल गोली खिलाना बहुत जरूरी है। पूरे देश में 10 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाता है। सोमवार को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया गया। स्कूलों, कॉलेजों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को एल्बेंडाजोल की खुराक दी गई। साथ ही छूटे हुए बच्चों को 14 फरवरी को खुराक दी जाएगी।
उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में सोमवार को राष्ट्रीय क्रमिक मुक्ति दिवस मनाया गया। इसके तहत आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूल और कॉलेजों के बच्चों को एल्बेंडाजोल की गोलियां खिलाई गईं। इधर जनपद आगरा में राष्ट्रीय क्रमिक मुक्ति दिवस पर स्वास्थ्य विभाग और बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की टीमें बच्चों को गोलियां खिलाते हुए नजर आईं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव के निर्देशन में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. संजीव वर्मन और विकास खंड बरौली अहीर के ब्लॉक प्रमुख काका उत्तम सिंह ने स्कूल की छात्र-छात्राओं हिमांशी, आनंद, ओम मुदगल और तमन्ना को एल्बेंडाजोल की दवा खिलाकर कृमि मुक्ति दिवस का शुभारंभ किया। सोमवार को आगरा के स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर 15.1 लाख बच्चों ने दवा की खुराक ली। नोडल अधिकारी ने उद्घाटन के बाद कहा कि पेट में कृमि संक्रमण को रोकने के लिए बच्चों व किशोर-किशोरियों को छह-छह माह के अंतराल पर वर्ष में दो बार पेट से कीड़े निकालने की दवा खिलाना आवश्यक है। कृमि मुक्ति अभियान एक सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल है, जिसका उद्देश्य बच्चों में कृमि संक्रमण को रोकना और नियंत्रित करना है। एसीएमओ की मौजूदगी में विद्यालय में 510 विद्यार्थियों को दवा खिलाई गई। जिले के सभी ब्लॉकों के 5314 स्कूलों और 2988 आंगनबाड़ी केंद्रों पर एक से 19 वर्ष आयु वर्ग के लाभार्थियों को एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई गई। डॉ. संजीव बर्मन ने बताया कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का उद्देश्य बच्चों में कृमि संक्रमण को समाप्त करना है। कृमि संक्रमण से बच्चों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे उनका विकास प्रभावित होता है। इस अभियान में एवीडेंस एक्शन संस्था के जिला समन्वयक शाहिद खान सहयोग कर रहे हैं। अभियान के दौरान 23.18 लाख लाभार्थियों को दवा खिलाने का लक्ष्य है।
दवा खाने के बाद 12 वर्षीय छात्रा तमन्ना ने बताया कि मेरे विद्यालय की प्रधानाचार्य साहिबा खान द्वारा प्रार्थना के दौरान और पेरेंट्स मीटिंग में बच्चों और अभिभावकों को एल्बेंडाजोल के बारे में जानकारी दी गई। मेरे क्लास के अध्यापक द्वारा उपस्थित सभी बच्चों को कृमि संक्रमण से संबंधित जानकारी दी गई और आज आयोजित कार्यक्रम में मैंने पेट से कीड़े निकालने की दवा (एल्बेंडाजोल) का सेवन किया। अभी तक मुझे कोई भी परेशानी नहीं हुई है। यह दावा सुरक्षित है। इस मौके पर एमओ डॉ. देवेंद्र सिंह, जिला समन्वयक एवडेंस एक्शन शाहिद खान, एआरपी बरौली अहीर अनिल कुमार शर्मा, एचईओ सतीश यादव, आंगनवाड़ी सुपरवाइजर ममता सिंह, आईओ रविंद्र सहित स्कूल के सभी अध्यापक मौजूद रहे मौजूद रहे।

UP News : कुपोषण और एनीमिया की समस्या
(Malnutrition and anemia problem)
बता दें कि देश में 10 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य एक साल से 19 साल की आयु के सभी बच्चों को कृमि मुक्त करना है। यह दिवस दुनिया में कृमि मुक्ति की सबसे बड़ी पहल के रूप में माना जाता है। इसकी शुरुआत भारत में साल 2015 में हुई थी। यह पहल उस समय लगभग 240 मिलियन बच्चों तक पहुंचने के लिए की गई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की मानें तो आंत के कीड़े, जिन्हें मृदा-संचारित कृमि भी कहा जाता है। लोगों में सबसे अधिक प्रचलित बीमारियों में से एक हैं। ये नेमाटोड एस्केरिस लुम्ब्रिकोइड्स (राउंडवॉर्म), ट्राइचुरिस ट्राइचियूरा (व्हिपवॉर्म) और एंसिलोस्टोमा डुओडेनेल या नेकेटर अमेरिकनस (हुकवॉर्म) के संक्रमण के कारण होते हैं। कृमि संक्रमण से बच्चे की पोषक तत्वों को अवशोषित करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे कुपोषण, एनीमिया और मानसिक एवं शारीरिक विकास में रुकावट जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
UP News : कृमि मुक्ति क्या है? (What is deworming?)
डीवर्मिंग बच्चों में कृमि संक्रमण का इलाज करने की प्रक्रिया है, जिसमें दवा का उपयोग करके उनके शरीर से आंतों के कीड़े या परजीवी को खत्म किया जाता है। बच्चों को डीवर्मिंग की गोलियां नहीं खिलाई जाती हैं तो उनमें मिट्टी से फैलने वाले कृमि विकसित हो सकते हैं। यह एक विकार है, जिसमें कृमियों का एक समूह मानव शरीर को प्रभावित करता है। कृमि संक्रमण नवजात मृत्यु दर के लिए एक बड़ा खतरा है।
UP News : राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का इतिहास (History of National Deworming Day)
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने फरवरी 2015 में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस की शुरुआत की थी। बच्चों को कृमि मुक्त करना इस पहल का मुख्य लक्ष्य है। यह कार्यक्रम साल 2016 में देश भर के सभी जिलों में विस्तारित किया गया था। तभी से 10 फरवरी और 10 अगस्त को प्रतिवर्ष दो बार यह दिवस मनाया जाता है। कृमि मुक्ति कार्यक्रम सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में चलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को कृमि मुक्ति की दवा एल्बेंडाजोल की गोलियां खिलवाना है।

UP News : राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का महत्व (Importance of National Deworming Day)
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मृदा संचारित कृमि (एसटीएच) के लिए एक सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान है। इस दिन पहला लक्ष्य एल्बेंडाजोल की एक खुराक को अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंचना है। एसटीएच संक्रमण के लिए सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं, इसलिए प्रीस्कूलर और स्कूली आयु के बच्चे इस पहल के लक्षित जनसांख्यिकीय हैं। इस दिन बच्चों के स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ाने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बच्चों तक पहुंचने के लिए राज्य सरकारें प्रयास करती हैं। इसका लक्ष्य बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। इसके अलावा एसटीएच संक्रमण के बोझ को कम करना है। इसका एक और लक्ष्य पर्यावरण और व्यक्तिगत स्वच्छता और जागरूकता बढ़ाना है। लोगों को एसटीएच संक्रमणों और उनसे बचने के तरीकों के बारे में शिक्षित करना है।
UP News : कृमि संक्रमण के लक्षण (Symptoms of worm infection)
नोडल अधिकारी ने बताया कि गंभीर कृमि संक्रमण से दस्त, पेट में दर्द, कमजोरी, उल्टी और भूख न लगने जैसे लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। हल्के संक्रमण में यह लक्षण नहीं दिखते हैं, इसलिए बचाव की दवा सभी को खानी चाहिए। दवा का सेवन करने से कुछ बच्चों में जी मिचलाने, उल्टी और दस्त जैसे लक्षण आ सकते हैं जो स्वतः ठीक हो जाते हैं। दवा का सेवन हमेशा खाना खाने के बाद ही करना है।
कृमि संक्रमण से बचाव के छह उपाय (Six ways to prevent worm infection)
▪ नाखून साफ और छोटे रखें
▪ खाना ढक कर रखें
▪ खाने से पहले और शौचालय का इस्तेमाल करने के बाद साबुन पानी से हाथ धोएं
▪ जब भी बाहर निकलें जूते पहनें
▪ पीने के लिए साफ पानी का इस्तेमाल करें
▪ हमेशा शौचालय का इस्तेमाल करें, खुले में शौच न करें
▪ आसपास साफ सफाई रखें

यह हैं कृमि मुक्ति के फायदे (These are the benefits of deworming)
▪ रोग प्रतिरोधक शक्ति में वृद्धि
▪ स्वास्थ्य और पोषण में सुधार
▪ एनीमिया नियंत्रण
▪ समुदाय में कृमि व्यापकता में कमी
▪ सीखने की क्षमता और कक्षा में उपस्थिति में सुधार
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